शिव ब्रत लाल वर्मन
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पहचान: आध्यात्मिक व्यक्तित्व, लेखक और राधास्वामी मत के प्रचारकशिव ब्रत लाल वर्मन का जन्म 1860 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के भदोही ज़िले में हुआ। वे “दाता दयाल” और “महर्षि जी” के नाम से भी प्रसिद्ध थे। अपनी विद्वत्ता, आध्यात्मिक सेवाओं और विपुल लेखन के कारण उन्हें राधास्वामी आंदोलन की प्रमुख हस्तियों में गिना जाता है।उनकी प्रारंभिक शिक्षा गोपीगंज में हुई। उन्होंने लक्ष्मण प्रसाद से हिंदी तथा मौलाना अब्दुल वहीद से अरबी, उर्दू और फ़ारसी की शिक्षा प्राप्त की। बाद में चunar (ज़िला मिर्जापुर) में अंग्रेज़ी शिक्षा प्राप्त की। कायस्थ पाठशाला, इलाहाबाद से एफ.ए. करने के बाद उन्होंने म्योर सेंट्रल कॉलेज, इलाहाबाद में प्रवेश लिया और 1888 में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। अपने आध्यात्मिक प्रचार-प्रसार के दौरान उन्हें अमेरिका की शिकागो यूनिवर्सिटी से एम.ए. और एल.एल.डी. की उपाधियाँ भी प्राप्त हुईं।उनके आध्यात्मिक गुरु राय बहादुर सालिग्राम साहिब (हज़ूर महाराज) थे, जिनके प्रभाव में वे राधास्वामी आध्यात्मिक आंदोलन से जुड़े। 1898 में अपने गुरु के देहावसान के बाद 1939 तक उन्होंने इस आंदोलन के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारत सहित अनेक देशों में इसके संदेश का प्रसार किया।शिव ब्रत लाल ने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सेवाएँ दीं। वे लाहौर से प्रकाशित उर्दू साप्ताहिक “आर्य गज़ट” के संपादक रहे और 1 अगस्त 1907 को “साधु” नामक पत्रिका का प्रकाशन आरम्भ किया, जो शीघ्र ही लोकप्रिय हो गई। उनकी असाधारण लेखन-प्रतिभा के कारण उन्हें व्यापक ख्याति मिली। कहा जाता है कि उन्होंने सामाजिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर लगभग तीन हज़ार पुस्तकें, पुस्तिकाएँ और पत्रिकाएँ लिखीं या संपादित कीं।उनकी प्रमुख कृतियों में “लाइट ऑन आनंद योग”, “दयाल योग”, “शब्द योग”, “राधास्वामी योग”, “राधास्वामी मत प्रकाश”, “कबीर योग”, “नानक योग”, “कर्म रहस्य”, “सहज योग”, “शरणागति योग” और “अनमोल विचार” शामिल हैं। राधास्वामी दर्शन और सूरत-शब्द योग पर उनके महत्वपूर्ण योगदान के कारण उन्हें “राधास्वामी मत का वेदव्यास” भी कहा जाता है।1911 में उन्होंने बर्मा, मलाया, सिंगापुर, जावा, हांगकांग, जापान और अमेरिका की यात्रा की तथा अनेक स्थानों पर आध्यात्मिक व्याख्यान दिए। 1912 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोपीगंज में अपने आश्रम की स्थापना की, जो आगे चलकर राधास्वामी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना।निधन: शिव ब्रत लाल वर्मन का निधन 23 फ़रवरी 1939 को महाशिवरात्रि के दिन हुआ। उनकी समाधि गोपीगंज के निकट राधास्वामी धाम में स्थित है।