उस्लूब अहमद अंसारी
लेखक
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पहचान: प्रख्यात समीक्षक, इक़बालियात के विशेषज्ञ, ग़ालिब शनास और अंग्रेज़ी साहित्य के शिक्षकउस्लूब अहमद अंसारी 1925 को दिल्ली में पैदा हुए। उन्होंने 1946 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अंग्रेज़ी साहित्य में एमए फर्स्ट क्लास के साथ किया और 1947 में इसी यूनिवर्सिटी के अंग्रेज़ी विभाग में लेक्चरर नियुक्त हुए। बाद में उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुए। वह 1959 में रीडर, 1967 में प्रोफेसर और 1965 से 1984 तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अंग्रेज़ी विभाग के अध्यक्ष रहे। अंग्रेज़ी भाषा और साहित्य के शिक्षण और शोध (रिसर्च) में उनकी सेवाओं को विशेष स्थान प्राप्त है।उस्लूब अहमद अंसारी की गिनती उर्दू के प्रख्यात समीक्षकों, इक़बालियात के विशेषज्ञों और ग़ालिब शनास लेखकों में होती है। उनकी आलोचना (तनक़ीद) किसी खास साहित्यिक विचारधारा या स्कूल की पाबंद नहीं है, बल्कि आज़ाद, संतुलित और मूल पाठ (टेक्स्ट) पर आधारित है, जो उनके दिमाग की स्वायत्तता (खुदमुख्तारी) को दर्शाती है। वे साहित्यिक कृतियों को समझने, उनके अर्थों और कलात्मक खूबियों को उभारने पर ज़ोर देते हैं और निष्पक्ष विश्लेषण के ज़रिए कविता को वैचारिक स्तर पर निखारते हैं। उनके लेखन में कमियों के बजाय खूबियों की तलाश का एक सहानुभूतिपूर्ण रवैया साफ़ दिखाई देता है, जबकि ग़ालिब, इक़बाल, उर्दू उपन्यास और काव्य-आलोचना उनके विशेष विषय रहे। उनकी लेखन शैली सरल और स्पष्ट है, जहाँ वे बातों को खुलकर बयां करना पसंद करते हैं, जिसकी वजह से कहीं-कहीं खिंचाव और दोहराव भी आ जाता है।उनकी मुख्य उर्दू किताबों में "अदब और तनक़ीद", "नक़्श-ए-ग़ालिब", "इक़बाल की तेरह नज़्में", "नक़्श-ए-इक़बाल", "इक़बाल की मुंतख़ब नज़्में और ग़ज़लें", "इक़बाल: हर्फ़-ओ-मोमिन", "नक़्श हाए रंग रंग" (ग़ालिब), "अतराफ़-ए-रशीद अहमद सिद्दीक़ी", "उर्दू के पंद्रह नाविल", "आईना ख़ाने में", "तनक़ीदी तब्सिरा" और "हर्फ़-ए-चंद" शामिल हैं। उन्होंने "ग़ज़ल तनक़ीद" (दो खंडों में), "ग़ालिब: जदीद तनक़ीदी तनाज़ुरात", "इक़बाल: जदीद तनक़ीदी तनाज़ुरात" और "नज़र-ए-मंज़ूर" का संपादन भी किया। अंग्रेज़ी में भी उनकी आठ-दस किताबें और संपादित कृतियाँ प्रकाशित हुईं, जिनमें विलियम ब्लैक पर मौलिक पुस्तक और मिल्टन, जॉन डन, सर वाल्टर रेले, सर सैयद अहमद खान और अल्लामा इक़बाल पर संपादित शैक्षणिक कार्य शामिल हैं। शेक्सपियर से जुड़े उनके अंग्रेज़ी लेखों को पश्चिम में बहुत पसंद किया गया और उनके संदर्भ (हवाले) भी दिए जाते हैं।उस्लूब अहमद अंसारी पत्रकारिता और साहित्यिक संपादन से भी जुड़े रहे। उन्होंने 1979 से 2001 तक उर्दू की मशहूर आलोचनात्मक पत्रिका "नक़्द-ओ-नज़र" का संपादन किया। इसके अलावा वे 'अलीगढ़ जर्नल ऑफ इंग्लिश स्टडीज' (Aligarh Journal of English Studies) और 'अलीगढ़ क्रिटिकल मिसलेनी' (Aligarh Critical Miscellany) के संस्थापक संपादक भी रहे। उनकी शैक्षणिक और साहित्यिक सेवाओं के सम्मान में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, ग़ालिब पुरस्कार और अन्य महत्वपूर्ण सम्मानों से नवाज़ा गया।निधन: 1 मई 2016 को अलीगढ़ में उनका निधन हुआ।