निसार अहमद फ़ारूक़ी
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पहचान: शोधकर्ता, सूफ़ी अध्ययन के विशेषज्ञ, अरबी भाषा एवं साहित्य के अध्यापक तथा दक्षिण एशिया में सूफ़ी अध्ययन के प्रतिष्ठित विद्वाननिसार अहमद फ़ारूक़ी का जन्म 29 जून 1934 को अमरोहा, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनके पिता का नाम तस्लीम अहमद फ़ारूक़ी और माता का नाम मैमूना खातून था। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने अपने नाना और मामू से घर पर प्राप्त की, जहाँ अरबी, फ़ारसी, उर्दू और इस्लामी अध्ययन की बुनियाद पड़ी। बाद में हैदराबाद और अलीगढ़ में शिक्षा प्राप्त की, अरबी में एम.ए. किया और दिल्ली विश्वविद्यालय से “प्रारंभिक मुस्लिम इतिहासलेखन” विषय पर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।उन्होंने 1964 में दिल्ली विश्वविद्यालय से अपने अध्यापन जीवन की शुरुआत की। बाद में दिल्ली कॉलेज में अरबी के अध्यापक नियुक्त हुए, 1977 में दिल्ली विश्वविद्यालय में आधुनिक अरबी के रीडर बने और 1985 में प्रोफ़ेसर एवं अरबी विभागाध्यक्ष नियुक्त हुए। 2002 में सेवानिवृत्त हुए।निसार अहमद फ़ारूक़ी का नाम उपमहाद्वीप के प्रमुख शोधकर्ताओं, सूफ़ी अध्ययन के विशेषज्ञों और उर्दू की महत्वपूर्ण विद्वत् हस्तियों में लिया जाता है। सूफ़ीवाद, इस्लामी इतिहास, अरबी-फ़ारसी साहित्य और उर्दू शोध के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय सेवाएँ हैं। वे अरबी, फ़ारसी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी के अतिरिक्त पंजाबी भाषा से भी भली-भाँति परिचित थे।उनकी प्रमुख कृतियों में “तलाश-ए-मीर” और “तलाश-ए-ग़ालिब” शामिल हैं। उन्होंने ग़ालिब के पत्रों के आधार पर “ग़ालिब की आत्मकथा” का संकलन किया तथा “ज़िक्र-ए-मीर” का उर्दू अनुवाद भी किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने “कुल्लियात-ए-मुसहफ़ी”, कुदरतुल्लाह शौक़ के तज़किरा “तबक़ातुश्शुअरा” और क़यामुद्दीन के “मक़ालातुश्शुअरा” का शोध एवं संपादन किया। उन्होंने अनेक साहित्यिक और विद्वतापूर्ण ग्रंथों का संपादन, टीकांकन और अनुवाद भी किया। सूफ़ीवाद और सूफ़ी संतों पर उनकी शोध विशेष महत्व रखती है, जबकि “मक़ालात-ए-फ़ारूक़ी” उनकी विद्वत्ता का महत्वपूर्ण परिचायक मानी जाती है।निधन: निसार अहमद फ़ारूक़ी का निधन 28 नवंबर 2004 को नई दिल्ली में हुआ। उन्हें उनके पैतृक कब्रिस्तान, अमरोहा (उत्तर प्रदेश) में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।