हुसैन अहमद मदनी
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मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी (1879–1957) भारतीय उपमहाद्वीप के प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान, मुहद्दिस और स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका मूल नाम हुसैन अहमद था और वे शैख़ुल-हिंद मौलाना महमूद हसन देवबंदी के प्रमुख उत्तराधिकारियों में गिने जाते थे। उनका जन्म 19 शव्वाल 1296 हिजरी, अर्थात 1879 में बांगर मऊ, ज़िला उन्नाव, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनका संबंध एक प्रतिष्ठित धार्मिक एवं विद्वत परिवार से था और उनका वंश حضرت इमाम हुसैन बिन अली से जुड़ता था।मौलाना हुसैन अहमद मदनी ने प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता से प्राप्त की और कम उम्र में दारुल उलूम देवबंद में दाख़िला लिया, जहाँ उन्होंने प्रमुख विद्वानों से धार्मिक शिक्षा प्राप्त की। बाद में वे दारुल उलूम देवबंद के प्रमुख शिक्षकों में शामिल हुए और शैख़ुल-हदीस के पद पर आसीन रहे। उनका जीवन शैक्षिक एवं धार्मिक सेवाओं के साथ-साथ भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों से भी गहराई से जुड़ा रहा।उन्होंने शुद्धि आंदोलन के विरोध तथा मुसलमानों के धार्मिक और सामाजिक हितों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। वे जमीयत तब्लीग़ुल इस्लाम, संयुक्त प्रांत आगरा से भी जुड़े रहे और 1931 में इसके उपाध्यक्ष तथा 1941 में जमीयत तब्लीग़ुल इस्लाम, संयुक्त प्रांत कानपुर के सदस्य के रूप में सेवाएँ दीं। उनकी विद्वत्ता, धार्मिक सेवाओं और व्यावहारिक संघर्ष ने उन्हें भारतीय उपमहाद्वीप के धार्मिक और राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया।