हारून खां शेरवानी
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पहचान: प्रख्यात इतिहासकार, शिक्षाविद्, राजनीति शास्त्री, पद्म भूषण से सम्मानित विद्वान एवं दकनी इतिहास के प्रामाणिक शोधकर्ताप्रोफेसर हारून ख़ान शेरवानी का जन्म 30 मार्च 1891 को दतौली, ज़िला अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल स्कूल अलीगढ़, हाई स्कूल मुरादाबाद और पैराडाइज़ हाई स्कूल लंदन से प्राप्त की। उच्च शिक्षा के लिए वे इंग्लैंड गए, जहाँ से उन्होंने University of Oxford से बी.ए. (ऑनर्स) किया और 1912 में बार-एट-लॉ की उपाधि प्राप्त की। छात्र जीवन से ही उनमें नेतृत्व, संगठन और राष्ट्रीय सेवा का भाव स्पष्ट था; ऑक्सफोर्ड में रहते हुए वे एडिसन क्लब तथा लंदन इंडियन एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए।भारत लौटने के बाद वे राजनीति और शिक्षा—दोनों क्षेत्रों में सक्रिय हुए। 1915 में वे मुस्लिम यूनिवर्सिटी फ़ाउंडेशन कमेटी के सदस्य बने और इसी दौर में Indian National Congress से जुड़कर विभिन्न कांग्रेस अधिवेशनों और राष्ट्रीय आंदोलनों में भाग लिया। 1919 में उनकी नियुक्ति Osmania University में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में हुई, जहाँ से उनके दीर्घ अकादमिक जीवन का आरंभ हुआ। 1929 में वे उस्मानिया विश्वविद्यालय के इतिहास और राजनीति विज्ञान विभागों के अध्यक्ष नियुक्त हुए और 1945 में निज़ाम कॉलेज के प्रिंसिपल बने। 1946 से 1948 तक वे दिल्ली के प्रसिद्ध एंग्लो-अरैबिक कॉलेज से संबद्ध रहे। 1948 से 1951 तक पुनः उस्मानिया विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष रहे।प्रोफेसर शेरवानी की विद्वत्ता विशेष रूप से दकन के इतिहास पर उनके गहन शोध की वजह से मानी जाती है। उन्होंने बहमनी सल्तनत, दकनी संस्कृति, मुस्लिम राजनीतिक चिंतन और इस्लामी शासन व्यवस्था जैसे विषयों पर अत्यंत महत्त्वपूर्ण और प्रामाणिक ग्रंथ लिखे। उनकी प्रमुख कृतियों में दकन के बहमनी सुल्तान, दकनी कल्चर, मुसलमानों के राजनीतिक विचार और उनका प्रशासनिक ढाँचा, राजनीति के सिद्धांत, राजनीति विज्ञान की मूल बातें, सैयद अहमद ख़ाँ और हिंदू-मुस्लिम एकता, क़ुरआन का राज्य सिद्धांत तथा प्राचीन यूनान का इतिहास (अनुवाद) शामिल हैं। उनकी रचनाओं में विद्वत्ता, शोध-निष्ठा और ऐतिहासिक दृष्टि स्पष्ट दिखाई देती है।शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनकी सेवाओं के सम्मान में भारत सरकार ने 1969 में उन्हें Padma Bhushan से सम्मानित किया, जबकि Aligarh Muslim University ने 1976 में उन्हें मानद डी.लिट. की उपाधि प्रदान की। उनके शैक्षिक योगदान के सम्मान में Maulana Azad National Urdu University, हैदराबाद ने उनके नाम पर हारून ख़ान शेरवानी केंद्र बराए मुतालिआत-ए-दकन की स्थापना की, जो दकनी अध्ययन का एक महत्त्वपूर्ण शोध केंद्र है।निधन: 15 सितंबर 1980 को हैदराबाद दकन में उनका निधन हुआ।